प्रतिबिम्ब

₹150.00

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आलोक चक्रवाल
2018, 120pp
Papercover, 9789385883552
Rs. 150
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आज के युग में कविता रचना में एक ठहराव सा आया हुआ महसूस किया जाता है। ऐसे में भावों की नवीनता, निश्छलता, ताज़गी और सौम्यतापूर्ण प्रतिबिम्ब की रचना इस धारणा को तोड़ती सी प्रतीत होती है।

प्रतिबिम्ब आधुनिक कविताओं का एक ऐसा संचय है जो कवि ने जीवन और समाज को परिलक्षित करने के लिए लिखी हैं। इन कविताओं में कई प्रकार के नए प्रयोग किये गए हैं। यह लय और ताल के साथ गद्यमयी काव्य लिखने की एक नवीन चेष्टा भी है। इन कविताओं में हर प्रकार के विषय और काव्य के विभिन्न रसों का समावेश है। प्रकृति, समाज और मानव के प्रति आकर्षण और संवेदना देखते ही बनती है। भावों की उत्कृष्ता के साथ साथ भाषा की सरलता एवं सहजता इन कविताओं की सरसता में संवृद्धि करते हैं। प्रतिबिम्ब मानव जीवन को समग्रता से एक नए रूप में प्रतिबिम्बित करने का प्रयास है।

डॉ. आलोक चक्रवाल (जन्म 20 सितम्बर 1969), प्रोफेसर, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट, मूलतः भारत की पुरातनम नगरी काशी के निवासी हैं। उन्होंने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया। साहित्य सृजन के क्षेत्र में यह उनका प्रथम प्रयास है। इस संकलन की बहुधा कवितायें कवि ने हवाई यात्राओं के दौरान लिखी हैं। यथार्थ के साथ साथ कल्पनाओं की उड़ान पाठक को अपने साथ उड़ने के लिए उत्प्रेरित करती है।